मेरी माँ हमेशा मुझसे यही पूछती है की, “शरीर का सबसे महत्वपुर्ण भाग कौनसा है…..???”
और कई सालो से मै यही सोच रहा की क्या मै इसका सही जवाब कभी ढूंड पाउँगा.


जब मै जवान था, मैंने सोचा था की एक इंसान की तरह आवाज़ बहोत जरुरी है, इसीलिए इस समय मैंने कहा था की, “मेरे कान बहोत जरुरी है, माँ.”

लेकिन माँ ने आसानी से कह दिया, “नहीं. बहोत से लोग बहरे भी होते है. लेकिन तुम इसके बारे में सोचते रहो मै तुम्हे दोबारा पुछुंगी….”

इस तरह बहोत से साल बीत चुके थे उन्हें ये प्रश्न पुछे हुए.
जबसे मैंने पहली दफा जवाब दिया था, तभी से मै इस प्रश्न का सही जवाब जानने में लगा हुआ था.
इसीलिए मैंने इस बार अपनी माँ से कहा, “माँ, दृष्टी हम सभी के लिए बहोत जरुरी है, इसीलिए हमारी आँख ही हमारे शरीर का सबसे महत्वपुर्ण अंग है…..”


माँ ने मेरी ओर देखते हुए कहा की, “तुम तेज़ी से सीखते चले जा रहे हो, लेकिन तुम्हारा जवाब इस बार भी गलत ही है क्योकि दुनिया में बहोत से लोग अंधे भी है……”


इस समय दोबारा मै चकरा गया था, लेकिन मैंने हार नही मानी मै सालो तक इस प्रश्न का जवाब ढूंडता रहा, मेरी माँ ने इस बिच दो बार और ये प्रश्न पुछा था और मेरा जवाब सुनकर हमेशा उनका जवाब : नही ही होता था….


और अंत में वह कहती थी की, ‘मेरे बेटे, तुम दिन ब दिन और होशियार होते चले जा रहे हो…….”
तभी एक साल मेरे दादा की मृत्यु हो गयी. उस समय सभी दुःखी थे. सभी लोग रो रहे थे. बल्कि मेरे पिताजी भी रो रहे थे.


मुझे याद है की उस मैंने मेरे पिता को अपने जीवन में सिर्फ दुसरी बार ही रोते हुए देखा था.
जब हमारे दादा को अंतिम विदाई देने की हमारी बारी आई तो मेरी माँ मेरी तरफ देखने लगी.
और तभी माँ ने मुझसे पूछा : “क्या अब तक तुम्हे हमारे शरीर के सबसे महत्वपुर्ण अंग का पता चला……????”

मै उन्हें ऐसे समय में इस तरह का प्रश्न पुछते देख अचंभित हो गया. मै हमेशा से यही सोचता था की यह प्रश्न सिर्फ मेरे और मेरी माँ के बिच का एक खेल है.

माँ को मेरे चेहरे पर परेशानी की झलक दिखाई दी और उन्होंने मुझसे कहा की,
“यह प्रश्न बहोत जरुरी है. यह प्रश्न हमें बताता है की हम वास्तव में हमारा जीवन जी रहे है. पिछले सालो में जितने भी तुमने मुझे शरीर के अंग बताये मैंने उन्हें गलत बताया और वे गलत क्यों है ये भी बताया.
लेकिन आज तुम्हे ये सिखने की जरुरत है की कौनसा अंग हमारे शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण है…..”

उन्होंने निचे मेरी तरफ देखा, ऐसा कोई माँ ही कर सकती थी. मैंने उसकी आँखे देखी जिसमे आँसू आ रहे रहे. उन्होंने कहा, “मेरे प्यारे बेटे, हमारे शरीर का सबसे महत्वपुर्ण अंग हमारे कंधे है…..”
ये सुनकर मैंने पुछा : “क्या यह इसलिए की वह हमारे सर को अपने उपर रखते है…..????”
माँ ने जवाब दिया :

“नहीं, बल्कि इसलिए की जब भी हमारा दोस्त या कोई प्रिय रोता है तो वे उनके सर को अपने उपर रखते है. कंधे हमारे लिए नहीं बल्कि दूसरो के लिए बने होते है. ये दूसरो के दर्द की दवा के रूप में काम करते है.

कई बार जब व्यक्ति मुश्किलों का सामना करते-करते थककर हार जाता है तब किसी के ये शब्द की , “मै हु ना” उसमे एक नयी प्रेरणा व उर्जा का संचार करते है. कहने को तो कई दर्जन लोग हमारे दोस्त होते है लेकिन हमारी तकलीफ में वही दोस्त काम आता है जो हमारे दर्द को अपना दर्द समझता है, और हमें अपने कंधे का आसरा देता है. ये 100% सही है की आपके दोस्त का कंधा आपकी मुश्किलों को खत्म नही कर सकता लेकिन उसका कंधा आपको उन मुश्किलों से लढने की ताकत जरुर दे सकता है.

लोग वह भुल जाते है जो आप कहते हो..
लोग वह भी भुल जाते है जो आप करते हो…

लेकिन, लोग वह कभी नही भुलते जो आप उन्हें महसूस कराते हो….!!!!

एक अच्छा दोस्त हमेशा एक तारे की तरह होता है…..आप हमेशा उसे देख नही पाते,
लेकिन आप हमेशा जानते हो की वो वहा है….


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