जितनी भी गहरी दोस्ती क्यों न हो अगर उसके बीच घमंड आ जाए तो वो जल्द ही
टूट जाती है. ये कडवी सच्चाई है. जी हाँ, एक गाँव रमेश और मुकेश दो बहुत ही
पक्के दोस्त रहते थे, ये दोनों बचपन से ही एक साथ रहते थे और खेलते. इसकी
दोस्ती की लोग मिसाल दिया करते थे.
आगे एक को चोट लगती तो दूसरा रोता और अगर एक रोता तो दूसरा उसे हँसता. दोनों की जोड़ी गाँव में सबसे प्यारी थी. लेकिन लगता है कि किसी ने इनकी दोस्ती को नजर लगादी. दरअसल , पहले रमेश और मुकेश दोनों के घर की आर्थिक स्थित ये जैसी थी. लेकिन जैसे- जैसे दोनों बड़े होते गए वैसे वैसे दोनों की दोस्ती में खटास आने लगी. असल में क्या हुआ, मुकेश जब कक्षा 10 में था तब ही उसके पिता जी का निधन हो गया था, घर की पूरी जिम्मेदारी अब मुकेश के कंधो पर आ गई थी.
इस कारण मुकेश हो अपनी पढाई भी बीच में ही छोड़नी पड़ी. लेकिन रमेश के घर की आर्थिक स्थिति अब बहुत अच्छी हो गई थी. और रमेश आगे की पढाई के लिए शहर चला गया. लेकिन फिर भी रमेश ज्यादा नही पढ़ पाया, क्योंकि उसका पढाई में मन नहीं लगता था. और वो वापस अपने गाँव आ गया और अपने पिता जी का कारोबार देखने लगा, वहीं बेचारा मुकेश दिन रात मेहनत करता और अपने घर को चलता.
अब तो ऐसा हो गया था कि जब भी दोनों मिलते, तब भी किसी का किसी बात को लेकर दोनों के बीच तेज़ बहस हो जाती, असल में रमेश को अपने पैसों पर बहुत घामड़ आ गया था. वो अपने दोस्त को अपनी दुकान में नौकर की जॉब ऑफर कर रहा था,
मुकेश के ये सुनकर बहुत बुरा लगा. लेकिन वो कर भी क्या सकता था. आपने एक कहावत तो सुनी होगी, “समय में बहुत ताकत होती है” वही हुआ, ऐसा कई साल तक चलता रहा, लेकिन कुछ सालों बाद रमेश के सारे पैसे खत्म हो गए, और कारोबार भी बिक गया, नौबत यहाँ तक आ गई की अब घर में खाने को भी नहीं रहता था. वहीं, मुकेश की हालत अब पहले से बेहरत हो गई था.
वो भी अब अच्छे से रहता था, लेकिन उसे किसी भी चीज का घमंड नही था. जब मुकेश को अपने दोस्त रमेश की हालत के बारे में पता चाल तो वो अपने दोस्त की मदद करने चला गया. और बिना घमंड के उसकी मदद की. ये सब देख रमेश की आँखों में आंसू आ गए, रमेश ने कहा, “दोस्त मैंने तेरा कितना मजाक उड़ाया, फिर भी तुमने मेरी मदद की, मुझे माफ़ कर दो”. इसके बाद दोनों फिर से अच्छे दोस्त बन गए.
मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Love Story Leb” कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
धन्यवाद्।
आगे एक को चोट लगती तो दूसरा रोता और अगर एक रोता तो दूसरा उसे हँसता. दोनों की जोड़ी गाँव में सबसे प्यारी थी. लेकिन लगता है कि किसी ने इनकी दोस्ती को नजर लगादी. दरअसल , पहले रमेश और मुकेश दोनों के घर की आर्थिक स्थित ये जैसी थी. लेकिन जैसे- जैसे दोनों बड़े होते गए वैसे वैसे दोनों की दोस्ती में खटास आने लगी. असल में क्या हुआ, मुकेश जब कक्षा 10 में था तब ही उसके पिता जी का निधन हो गया था, घर की पूरी जिम्मेदारी अब मुकेश के कंधो पर आ गई थी.
इस कारण मुकेश हो अपनी पढाई भी बीच में ही छोड़नी पड़ी. लेकिन रमेश के घर की आर्थिक स्थिति अब बहुत अच्छी हो गई थी. और रमेश आगे की पढाई के लिए शहर चला गया. लेकिन फिर भी रमेश ज्यादा नही पढ़ पाया, क्योंकि उसका पढाई में मन नहीं लगता था. और वो वापस अपने गाँव आ गया और अपने पिता जी का कारोबार देखने लगा, वहीं बेचारा मुकेश दिन रात मेहनत करता और अपने घर को चलता.
अब तो ऐसा हो गया था कि जब भी दोनों मिलते, तब भी किसी का किसी बात को लेकर दोनों के बीच तेज़ बहस हो जाती, असल में रमेश को अपने पैसों पर बहुत घामड़ आ गया था. वो अपने दोस्त को अपनी दुकान में नौकर की जॉब ऑफर कर रहा था,
मुकेश के ये सुनकर बहुत बुरा लगा. लेकिन वो कर भी क्या सकता था. आपने एक कहावत तो सुनी होगी, “समय में बहुत ताकत होती है” वही हुआ, ऐसा कई साल तक चलता रहा, लेकिन कुछ सालों बाद रमेश के सारे पैसे खत्म हो गए, और कारोबार भी बिक गया, नौबत यहाँ तक आ गई की अब घर में खाने को भी नहीं रहता था. वहीं, मुकेश की हालत अब पहले से बेहरत हो गई था.
वो भी अब अच्छे से रहता था, लेकिन उसे किसी भी चीज का घमंड नही था. जब मुकेश को अपने दोस्त रमेश की हालत के बारे में पता चाल तो वो अपने दोस्त की मदद करने चला गया. और बिना घमंड के उसकी मदद की. ये सब देख रमेश की आँखों में आंसू आ गए, रमेश ने कहा, “दोस्त मैंने तेरा कितना मजाक उड़ाया, फिर भी तुमने मेरी मदद की, मुझे माफ़ कर दो”. इसके बाद दोनों फिर से अच्छे दोस्त बन गए.
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