वो कहावत वर्मा जी पर सटीक बैठती है, जिसमे कहा गया है, हमे तो अपनों ने लुटा,गैरो में कहाँ दम था, हमारी किश्ती वहां डूबी जहाँ पानी कम था. वर्मा जी मरीन इंजीनियर थे, उनके पापा एक सरकारी क्लर्क थे.घर में माँ और एक छोटा भाई और एक छोटी बहन थी, वर्मा जी शुरू से पढ़ने में बहुत तेज थे, जिसकी वजह से वो मरीन इंजीनियरिंग करके एक अच्छे कम्पनी में अच्छे पोस्ट पर थे. भले पापा की आय कम थी,लेकिन वर्मा जी को बहुत अच्छी सैलरी मिलती थी, और साल के छ महीने से आठ महीने तक जहाज पर ही रहते थे, बहुत छोटे से उम्र से वो ज्यादातर समय विदेशो में ही गुजरा करते थे,

लेकिन जब भी भारत आते तो अपने घर जरूर जाते थे, पटना से थोड़ी दुरी पर उनका घर था, पापा की आय ज्यादा ना होने की वजह से पटना में भी घर नहीं बना पाए, और ताबियार खराब होने की वजह से उसके पापा जल्दी ही गुजर गए थे,अब घर में सिर्फ उनकी माँ, छोटी बहन और छोटा भाई रह गया था, वर्मा जी जितना भी कमाते थे, सारा पैसा अपनी माँ को दे दिया करते थे, उन्होंने पटना में भी एक घर ले लिया और वहीँ अपने परिवार को रख दिया, छोटी बहन और छोटा भाई दोनों अब पटना में ही रह कर पढ़ते थे, कल तक जो परिवार पैसो के लिए मोहताज था, आज उसके पास पैसो की कोई कमी नहीं थी, क्योंकि वर्मा जी कभी पैसो की कमी ना होने दिए, उनकी माँ बहुत खुश थी, हो भी क्यों ना, जिंदगी भर दुःख में बिताये थे, आज इतना ख़ुशी जो मिल रही थी, हरेक महीने लाखो रूपये वर्मा जी कमा कर जो दे रहे थे ,

जिनसे वो सारी ख़ुशी खरीद पा रहे थे, धीरे-धीरे वर्मा जी बहन शादी के लायक हो गयी, जिसकी वजह से वर्मा जी की माँ ने उसकी शादी करवानी चाही, इस बार जब वो अपने घर आये तो माँ ने छोटी बहन की शादी करवा देने की बात कही, वर्मा जी भी सोचने लगे, फिर उन्हें ध्यान आया की बहन के जाने के बाद माँ भी अकेली हो जाएगी, फिर सारा घर उन्हें देखना होगा, इसलिए उन्हें लगा की उन्हें भी शादी कर लेनी चाहिए, फिर क्या था, एक से एक रिश्ता आने लगा, वर्मा जी के लिए दिल्ली से एक लड़की का रिश्ता आया, जो बहुत पढ़ी-लिखी होने के साथ-साथ बहुत ही पैसे वाली थी,वर्मा जी ने रिश्ता तय किया और लड़की के भाई से ही अपनी बहन का रिश्ता भी तय कर दिया, एक ही दिन दोनों भाई-बहन की शादी हो गयी, एक ही घर के इधर से भी दोनों भाई-बहन और उधर से भी भाई-बहन ही, सभी बहुत खुश थे, शादी के बाद वर्मा जी की बहन ससुराल चली गयी और उनकी पत्नी उनके घर आ गयी, कुछ दिनों के बाद वर्मा जी को वापस अपने काम पर लौटना था, इसलिए वो वापस जहाज पर चले गए, अचानक एक दिन उनकी पत्नी ने फोन पर बताया की वो ससुराल में नहीं रह सकती,

क्योंकि उनकी माँ उन्हें तंग करती हैं, ये बात वर्मा जी को अच्छी नहीं लगी, भला उनकी माँ उनकी पत्नी को क्यों परेशान करेगी, उन्हें अपनी पत्नी पर विश्वास नहीं हो रहा था, इधर उनकी माँ रो-रो कर अपना दुखड़ा सुना रही थी की उनकी पत्नी बहुत पैसे वाली है जिसकी वजह से वो आदर नहीं करती और हमेशा पैसो का रुतबा दिखाती रहती है, वर्मा जी को ये बात सही लगी की हो सकता है,

इतने बड़े परिवार की बेटी है, यहाँ एडजस्ट नहीं कर पा रही हो, अब भला वर्मा जी क्या करते? वो बार बार अपनी पत्नी को एडजस्ट करने को बोलते, जिसे सुन कर उनकी पत्नी गुस्सा हो गयी और उसने वर्मा जी से तलाक ले लिया, वर्मा जी भी तलाक दे दिए, वर्मा जी के तलाक होते ही उनकी बहन का भी तलाक हो गया, अब तो वर्मा जी बहुत गुस्सा में आ गए, उनके दिमाग में एक बात आ गयी की अमीर परिवार के लोग रिश्तो से ज्यादा पैसो को महत्व देते हैं, ये बात सच थी की वर्मा जी को बहुत पैसा मिलता था, उन्हें किसी चीज की कमी नहीं थी, लेकिन कभी भी वो अपने आपको अमीर नहीं समझते थे, हमेशा सादगी में जीते थे, बहुत ही सीधे और सुलझे हुए इंसान थे, इतना पैसा कमाने के बाद भी बिलकुल समान्य जीवन जीते थे,उन्हें देख कर नहीं कहा जा सकता था की वो इतने बड़े पोस्ट पर हैं या हमेशा विदेशो में ही रहते हैं.

खैर, वर्मा जी ने अपनी बहन की दूसरी शादी कर दी और खुद भी दूसरी शादी एक साधारण से परिवार में कर ली वो भी लड़की पढ़ी लिखी थी, और बहुत समझदार थी, शादी के बाद भी उनकी बहन ज्यादतर समय अपनी माँ के पास ही रहती थी, इधर शादी एक कुछ दिनों के बाद वर्मा जी फिर जहाज पर वापस लौट गए, लेकिन उनके जाने के कुछ ही दिनों के बाद उनकी दूसरी पत्नी भी उन्हें फोन पर बोलती थी की वो उनके परिवार के साथ नहीं रह सकती, वो अपने घर वापस जा रही है, वर्मा जी बहुत समझाये, लेकिन वो नहीं मान रही थी,

उनकी पत्नी का कहना था की उनके परिवार वाले उन्हें जान से मार देने की धमकी देते हैं, विराम जी को भला ये बात समझ में नहीं आ रही थी की उनके परिवार वाले उनकी पत्नी को क्यों मरेंगे? मतलब साफ़ था की उनकी पत्नी झूठ बोल रही है, और जब तक वो अपने घर वापस आते उनकी दूसरी पत्नी भी घर छोड़ कर जा चुकी थी, साथ ही उसने भी वर्मा जी से तलाक ले लिया, अब तो वर्मा जी एक बार फिर अकेले हो गए, उनकी समझ में नहीं आ रहा था की आखिर उनके साथ ऐसा क्यों हो रहा है? अंत में वर्मा जी ने तीसरी शादी की, इस बार बहुत ही गरीब घर की लड़की से शादी हुई जो पढ़ी लिखी भी नहीं थी, और उस लड़की को ज्यादा समझ बही नहीं था, या यूँ कह ले की उस लड़की का दिमाग पूरी तरह से विकसित नहीं था,

जिसकी दो दो बार शादी टूट चुकी हो, समाज की नजर में लड़का ही दोषी माना जायेगा, भले ही लड़का में कोई एब ना हो लेकिन समाज लड़का को ही दोष देगा, कुछ ऐसा ही वर्मा जी के साथ हुआ, खैर उन्होंने तीसरी शादी कर ही ली, और कुछ दिन घर पर रहने के बाद वो वापस काम पर चले गए, काम पर जाने के बाद उन्हें जब भी फुरसत मिलता अपनी पत्नी से बात करते तो पत्नी सिर्फ रोती कुछ नहीं बोलती, वर्मा जी को समझ में नहीं आता की आखिर उनकी पत्नी रोती क्यों रहती है, एक दिन अचानक वर्मा जी का दिल किया अपने घर वापस आने का और वो अपने घर वापस आये तो पाया की उनकी माँ, भाई और बहन तीनो मिल कर उनकी पत्नी को पिट रहा है, ये देख कर उनके होश उड़ गए वो किसी तरह अपनी पत्नी को बचा कर हॉस्पिटल ले गए,

जहाँ डॉक्टर ने उसका इलाज शुरू किया, डॉक्टर ने बताया की अगर लेन में देर हो जाती तो ये मर जाती, अब तो वर्मा जी को बहुत गुस्सा आया और वो वापस अपने घर आये और उन्होंने माँ को धमकी देते हुए पूछा पूरी सच्चाई बता दे वरना वो उन तीनो को जेल भिजवा देंगे, जेल का नाम सुन कर माँ ने सच्चाई बताई की जब तक उनकी शादी नहीं हुई थी वो सारा पैसा उसे ला कर देते थे, शादी एक बाद उन्हें पैसा कम मिलने लगा क्योँकि वो अपनी पत्नी को भी देने लगे, जिसकी वजह से उन तीनो ने मिल कर उनकी पत्नियों को परेशान करने लगा, और उनकी पत्निया घर छोड़ कर चली गयी, एक के जाने के बाद उन्होंने सोचा की दूसरी शादी नहीं करोगे, लेकिन दूसरी कर ली, उसे भी डरा कर परेशान करके भगा दिया,

 फिर उसने तीसरी शादी कर ली, बाकि दोनों तो मायके चली गयी लेकिन इसे कितना भी मारते थे, ये नहीं जाती भला ये जाती भी कहाँ, इसलिए इसे जान से मारने का प्लान था की तुम आ गए, ये सुन कर तो वर्मा जी के होश उड़ गए, अब तो उन्हें बहुत अफ़सोस हुआ, बहुत ज्यादा, उन्होंने माँ से कहा सिर्फ इतना कह देती की उसे और पैसा चाहिए वो दे देते, उन्होंने उनकी सारी जिंदगी बर्बाद कर दी, फिर वो हॉस्पिटल गए और अपनी पत्नी को ले कर दिल्ली चले गए, फिर उन्होंने अपनी दोनों पत्नी से माफ़ी मांगी और उनके परिवार वालो से भी और अपनी तीसरी पत्नी को अपने परिवार से दूर कर दिया साथ ही साथ उसका इलाज भी शुरू कर दिया, उन्होंने अपने परिवार से सारा रिश्ता-नाता भी तोड़ लिया, एक बार फिर उनका परिवार दाने-दाने के लिए मोहताज हो गया .


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