संजीव और स्वेता एक
ही स्कूल और क्लास में पढ़ते थे, दोनों एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे,शहर
के सबसे अच्छे स्कूल में उनके स्कूल की गिनती होती थी, हलाकि संजीव के घर
की माली हालत अच्छी नहीं थी,लेकिन संजीव के पापा उसी स्कूल में टीचर थे,
इसलिए स्कूल वालो ने उसका एडमिशन उस स्कूल में ले लिया था,
जबकि स्वेता के पापा बहुत बड़े व्यवसायी थे, वो शहर के नामी-गिरामी आदमी थे, उनके पास बहुत पैसा था और शहर के बड़े बड़े लोगो से उनकी जान पहचान थी, मंत्री हो या फिर अधिकारी सभी उन्हें जानते थे, भले ही संजीव और स्वेता के बीच जमीन-आसमान का अंतर था, फिर दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे, धीरे-धीरे एक साथ पढ़ते हुए दोनों बड़े हो रहे थे, संजीव पढ़ने में बहुत तेज था, वहीँ स्वेता पढ़ने में उतनी अच्छी नहीं थी, लेकिन संजीव हमेशा उसकी मदद किया करता था, संजीव की मदद से स्वेता को भी अच्छे नंबर आते थे,कुछ सालो के बाद दोनों ने अपना स्कूलिंग पूरा करके एक बार फिर एक ही कॉलेज में एडमिशन ले लिया, कॉलेज में आने के बाद दोनों और करीब हो गए और उनकी दोस्ती कब प्यार में बदल गयी उन्हें मालूम ही नहीं चला,संजीव हमेशा स्वेता से कहता था, तुम बहुत अमीर हो,मैं बहुत गरीब हूँ, तुम्हारे मम्मी-पापा मुझे कभी नहीं अपनाएंगे,
तुम मुझसे दूर चली जाओगी, इस पर स्वेता हमेशा दिलासा देती की उसके मम्मी-पापा बहुत अच्छे हैं, उससे बहुत प्यार करते हैं,और आज तक तुम मेरे साथ रहे हो,आगे भी तुम मेरे साथ रहोगे, मैं तुम्हे कभी नहीं छोडूगी,तुमसे यूँ ही हमेशा प्यार करती रहूंगी,संजीव उसकी बात सुन कर खुश हो जाता, और सोचता स्वेता हमेशा उसका साथ देगी, दोनों आगे की जिंदगी साथ गुजारने का मन बना लिए थे,दोनों ने पढ़ाई खतम होने के बाद शादी कर लेने का मन बना लिया था, लेकिन वो कहते हैं ना,
होनी को कोई नहीं टाल सकता है, कुछ ऐसा ही संजीव के साथ हुआ,अचानक एक दिन संजीव के पापा की ताबियार खराब हो गयी और तबियत में सुधार ना होने की वजह से उन्हें स्कूल से निकल दिया गया,अब तो घर की सारी जिम्मेदारी संजीव पर आ गयी, वो बहुत परेशान हो गया, उसने ट्यूशन पढ़ा कर घर की जिम्मेदारी उठानी शुरू कर दी, स्वेता ने उसका हमेशा हौसला बढ़ाया,लेकिन संजीव को ये समझ आ चूका था की वो टूयशन पढ़ा कर घर नहीं चला सकता इसलिए उसने पढ़ाई छोड़ दी और दूसरे शहर में जॉब की तलाश में निकल गया, जाने से पहले वो स्वेता से मिला और उसे उसका इंतजार करने को बोला,संजीव के जाने के बाद स्वेता अकेली हो गयी,तभी उसके मम्मी-पापा ने उसके लिए एक रिश्ता देख लिया, स्वेता को बताने पर स्वेता ने साफ़ साफ़ कह दिया की वो संजीव से प्यार करती है और संजीव से ही शादी करेगी, स्वेता के माता-पिता ने उनके द्वारा देखे लड़के से मिलने को कहा, साथ ही ये भी बताया की संजीव के साथ वो खुश नहीं रह पायेगी,
लेकिन स्वेता नहीं मानी, इधर काफी दिनों तक भटकने के बाद भी संजीव को कोई अच्छा जॉब नहीं मिल पा रहा था,लेकिन स्वेता हमेशा संजीव से बात करती और उसे दिलासा देती को उसे अच्छा जॉब मिल जायेगा, कुछ महीनो के बाद संजीव को पशुपालन विभाग में क्लर्क की सरकारी नौकरी मिल गयी संजीव बहुत खुश हुआ और वो ख़ुशी-ख़ुशी अपने शहर वापस आया और ये बात स्वेता को बताई तो स्वेत अभी बहुत खुश हुई, उसने संजीव को बताया की उसके मम्मी-पापा ने उसकी रिश्ते की बात दूसरे लड़के से की है लेकिन उसने मना कर दिया है, वो उसी से शादी करेगी और वो जो भी कमायेगा उसी में खुश रहेगी,
संजीव स्वेत की बात सुन कर बहुत खुश हुआ, उसे लगा की उसे नयी जिंदगी मिल गयी हो अच्छा जॉब के साथ साथ उसे प्यार करने वाली लड़की भी मिल रही थी.फिर संजीव अपने काम पर वापस लौट गया और अब स्वेता से उसकी रोज बात होने लगी, इधर स्वेता के मम्मी-पापा ने स्वेता से एक बार उसके द्वारा पसंद किये लड़के से मिलने को बोला,लड़का मंत्री का बेटा था, स्वेता मम्मी-पापा के कहने पर मंत्री के घर गयी और उसेक बेटे से मिली, दोनों के बीच काफी देर तक बात हुई,पहले तो संजीव से काफी देर तक बात होती थी फिर धीरे-धीरे दोनों में बात चीत कम होने लगी, कुहक दिनों के बाद तो स्वेता बहुत व्यस्त रहने लगी और संजीव से बात भी नहीं कर पाती थी,
संजीव भी उससे बात नहीं कर पाता था, कुछ दिनों से बात ना हो पाने की वजह से संजीव ने छुट्टी ले कर घर जाने की सोची और सोचा घर में सभी से मिल भी लूंगा और स्वेता से भी बात हो जाएगी, ये सोच कर वो छुट्टी का आवेदन ले कर अपने बॉस के पास पहुंचा तो उसे मालूम चला की उसके बॉस का ट्रांसफर हो गया है और नयी बॉस कल आएँगी,उसने सोचा कल ही नयी बॉस से मिल कर छुट्टी का आवेदन भी दे देगा.कल वो जब छुट्टी का आवेदन गए अपनी नयी बॉस के पास पहुंचा तो नयी बॉस को देख कर वो हैरान हो गया, क्योंकि उसकी नयी बॉस स्वेता थी,
उसे आस्चर्य हुआ की भला स्वेता यहाँ कैसे? वो बहुत खुश हुआ और स्वेता को गले लगाना चाहा,लेकिन ऑफिस होने की वजह से सिर्फ विश करके वहां से चला गया,शाम को वो स्वेता के बंगला पहुंचा,जो सरकार के द्वारा दिया गया था, वहां पहुँच कर उसने स्वेता को गले लगाना चाहा तो स्वेता ने उसे अपने पास आने से मना कर दिया,और बताया की उसे ये जॉब उसके होने वाले ससुर ने दिया है, उसके मम्मी-पापा ने जिस लड़के को मेरे लिए पसंद किया था,उसके पापा इसी विभाग के मंत्री हैं और उन्होंने ही उसे जॉब दिया है, उसने बहुत सोचा और पाया की वो लड़का तुमसे हर मामले में अच्छा है,इसलिए मैं तुमसे बात करना बंद कर दी,और वो उसे उसके नाम से ना बुलाये, क्योंकि वो अब उसकी बॉस है, ये सुन कर संजीव खुश देर तक यूँ ही शांत रहा,फिर यस मैडम बोल कर वहां से चला गया..
मै आशा करता हूँ की आपको ये “Love Story Leb Ki Kahani ” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
जबकि स्वेता के पापा बहुत बड़े व्यवसायी थे, वो शहर के नामी-गिरामी आदमी थे, उनके पास बहुत पैसा था और शहर के बड़े बड़े लोगो से उनकी जान पहचान थी, मंत्री हो या फिर अधिकारी सभी उन्हें जानते थे, भले ही संजीव और स्वेता के बीच जमीन-आसमान का अंतर था, फिर दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे, धीरे-धीरे एक साथ पढ़ते हुए दोनों बड़े हो रहे थे, संजीव पढ़ने में बहुत तेज था, वहीँ स्वेता पढ़ने में उतनी अच्छी नहीं थी, लेकिन संजीव हमेशा उसकी मदद किया करता था, संजीव की मदद से स्वेता को भी अच्छे नंबर आते थे,कुछ सालो के बाद दोनों ने अपना स्कूलिंग पूरा करके एक बार फिर एक ही कॉलेज में एडमिशन ले लिया, कॉलेज में आने के बाद दोनों और करीब हो गए और उनकी दोस्ती कब प्यार में बदल गयी उन्हें मालूम ही नहीं चला,संजीव हमेशा स्वेता से कहता था, तुम बहुत अमीर हो,मैं बहुत गरीब हूँ, तुम्हारे मम्मी-पापा मुझे कभी नहीं अपनाएंगे,
तुम मुझसे दूर चली जाओगी, इस पर स्वेता हमेशा दिलासा देती की उसके मम्मी-पापा बहुत अच्छे हैं, उससे बहुत प्यार करते हैं,और आज तक तुम मेरे साथ रहे हो,आगे भी तुम मेरे साथ रहोगे, मैं तुम्हे कभी नहीं छोडूगी,तुमसे यूँ ही हमेशा प्यार करती रहूंगी,संजीव उसकी बात सुन कर खुश हो जाता, और सोचता स्वेता हमेशा उसका साथ देगी, दोनों आगे की जिंदगी साथ गुजारने का मन बना लिए थे,दोनों ने पढ़ाई खतम होने के बाद शादी कर लेने का मन बना लिया था, लेकिन वो कहते हैं ना,
होनी को कोई नहीं टाल सकता है, कुछ ऐसा ही संजीव के साथ हुआ,अचानक एक दिन संजीव के पापा की ताबियार खराब हो गयी और तबियत में सुधार ना होने की वजह से उन्हें स्कूल से निकल दिया गया,अब तो घर की सारी जिम्मेदारी संजीव पर आ गयी, वो बहुत परेशान हो गया, उसने ट्यूशन पढ़ा कर घर की जिम्मेदारी उठानी शुरू कर दी, स्वेता ने उसका हमेशा हौसला बढ़ाया,लेकिन संजीव को ये समझ आ चूका था की वो टूयशन पढ़ा कर घर नहीं चला सकता इसलिए उसने पढ़ाई छोड़ दी और दूसरे शहर में जॉब की तलाश में निकल गया, जाने से पहले वो स्वेता से मिला और उसे उसका इंतजार करने को बोला,संजीव के जाने के बाद स्वेता अकेली हो गयी,तभी उसके मम्मी-पापा ने उसके लिए एक रिश्ता देख लिया, स्वेता को बताने पर स्वेता ने साफ़ साफ़ कह दिया की वो संजीव से प्यार करती है और संजीव से ही शादी करेगी, स्वेता के माता-पिता ने उनके द्वारा देखे लड़के से मिलने को कहा, साथ ही ये भी बताया की संजीव के साथ वो खुश नहीं रह पायेगी,
लेकिन स्वेता नहीं मानी, इधर काफी दिनों तक भटकने के बाद भी संजीव को कोई अच्छा जॉब नहीं मिल पा रहा था,लेकिन स्वेता हमेशा संजीव से बात करती और उसे दिलासा देती को उसे अच्छा जॉब मिल जायेगा, कुछ महीनो के बाद संजीव को पशुपालन विभाग में क्लर्क की सरकारी नौकरी मिल गयी संजीव बहुत खुश हुआ और वो ख़ुशी-ख़ुशी अपने शहर वापस आया और ये बात स्वेता को बताई तो स्वेत अभी बहुत खुश हुई, उसने संजीव को बताया की उसके मम्मी-पापा ने उसकी रिश्ते की बात दूसरे लड़के से की है लेकिन उसने मना कर दिया है, वो उसी से शादी करेगी और वो जो भी कमायेगा उसी में खुश रहेगी,
संजीव स्वेत की बात सुन कर बहुत खुश हुआ, उसे लगा की उसे नयी जिंदगी मिल गयी हो अच्छा जॉब के साथ साथ उसे प्यार करने वाली लड़की भी मिल रही थी.फिर संजीव अपने काम पर वापस लौट गया और अब स्वेता से उसकी रोज बात होने लगी, इधर स्वेता के मम्मी-पापा ने स्वेता से एक बार उसके द्वारा पसंद किये लड़के से मिलने को बोला,लड़का मंत्री का बेटा था, स्वेता मम्मी-पापा के कहने पर मंत्री के घर गयी और उसेक बेटे से मिली, दोनों के बीच काफी देर तक बात हुई,पहले तो संजीव से काफी देर तक बात होती थी फिर धीरे-धीरे दोनों में बात चीत कम होने लगी, कुहक दिनों के बाद तो स्वेता बहुत व्यस्त रहने लगी और संजीव से बात भी नहीं कर पाती थी,
संजीव भी उससे बात नहीं कर पाता था, कुछ दिनों से बात ना हो पाने की वजह से संजीव ने छुट्टी ले कर घर जाने की सोची और सोचा घर में सभी से मिल भी लूंगा और स्वेता से भी बात हो जाएगी, ये सोच कर वो छुट्टी का आवेदन ले कर अपने बॉस के पास पहुंचा तो उसे मालूम चला की उसके बॉस का ट्रांसफर हो गया है और नयी बॉस कल आएँगी,उसने सोचा कल ही नयी बॉस से मिल कर छुट्टी का आवेदन भी दे देगा.कल वो जब छुट्टी का आवेदन गए अपनी नयी बॉस के पास पहुंचा तो नयी बॉस को देख कर वो हैरान हो गया, क्योंकि उसकी नयी बॉस स्वेता थी,
उसे आस्चर्य हुआ की भला स्वेता यहाँ कैसे? वो बहुत खुश हुआ और स्वेता को गले लगाना चाहा,लेकिन ऑफिस होने की वजह से सिर्फ विश करके वहां से चला गया,शाम को वो स्वेता के बंगला पहुंचा,जो सरकार के द्वारा दिया गया था, वहां पहुँच कर उसने स्वेता को गले लगाना चाहा तो स्वेता ने उसे अपने पास आने से मना कर दिया,और बताया की उसे ये जॉब उसके होने वाले ससुर ने दिया है, उसके मम्मी-पापा ने जिस लड़के को मेरे लिए पसंद किया था,उसके पापा इसी विभाग के मंत्री हैं और उन्होंने ही उसे जॉब दिया है, उसने बहुत सोचा और पाया की वो लड़का तुमसे हर मामले में अच्छा है,इसलिए मैं तुमसे बात करना बंद कर दी,और वो उसे उसके नाम से ना बुलाये, क्योंकि वो अब उसकी बॉस है, ये सुन कर संजीव खुश देर तक यूँ ही शांत रहा,फिर यस मैडम बोल कर वहां से चला गया..
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