कुछ लोग ऐसे होते हैं,
जो कभी अंजाम की चिंता नहीं करते हैं और जो करना होता है कर गुजरते
हैं,लेकिन जब अंजाम होता है तब उन्हें पता चलता है की उन्होंने क्या खोया
है,और क्या पाया? ऐसा ही देखने को मिला भोपाल के शर्मा जी के परिवार में.
शर्मा जी सरकारी नौकरी करते थे, उन्हें दो बेटे और एक बेटी थी. दोनों बेटा
देखने में में भी राजकुमार था,और पढ़ने में भी
बहुत तेज था. बड़ा का नाम पंकज था और छोटा का नाम संजीव था,
जबकि बेटी का नाम श्रुति था.पंकज बचपन से ही पढ़ने में बहुत तेज था, वो हर क्लास में टॉप आता था, शर्मा जी पंकज से बहुत खुश रहा करते थे,जबकि छोटा संजीव भी पढ़ने में तेज था,लेकिन कभी अव्वल नहीं आता था. शर्मा जी उम्मीद थी की उनका बड़ा बेटा पंकज जुरूर उनका नाम रौशन करेगा.
वक्त के साथ साथ दोनों बेटे और बेटी बड़े हो गए,हलाकि शर्मा जी को अपनी बेटी की चिंता जरूर होती थी, क्योंकि उनकी बेटी को पढ़ने में कभी मन नहीं लगा था.खैर शर्मा जी ने सोच रखा था की वो अपनी बेटी की शादी कर देंगे,अगर वो आगे नहीं पढ़ी तो. तीनो बच्चे बड़े हो गए,और हुआ भी वही श्रुति ने आगे पढ़ने से मना कर दिया और शर्मा जी ने श्रुति की शादी कर दी. इधर पंकज जी-तोड़ मेहनत कर रहा था,
लेकिन उसकी किस्मत थी की साथ ही नहीं दे रहा था,और देखते देखते पंकज का सरकारी जॉब नहीं हुआ और पंकज बिलकुल बेढंगा की तरह रहने लगा, वैसे भी उसे दुनिया दारी से कोई मतलब नहीं थी,उसने सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई ही की थी,और जॉब ना होने की वजह से वो बिलकुल टूट चूका था,या यूँ कह ले की उसकी मानसिक स्थिति सही नहीं रही, डॉक्टर से दिखाया गया,डॉक्टर ने कहा, परेशान ना हो,इन्हे जितना प्यार दे सकते हैं, उतना प्यार दे.
धीरे-धीरे ये ठीक हो जायेंगे. शर्मा जी के दोस्तों ने उन्हें सलाह दिया की पंकज की शादी करवा दे, ताकि उसे प्यार और उसका केयर करने के लिए कोई आ जाएगी तो वो बिलकुल ठीक हो जायेगा. शर्मा जी ने अपने दोस्तों की बात मान ली और एक अच्छा रिश्ता आया, लड़की का नाम नेहा था, जो बहुत सुन्दर थी, शर्मा जी ने पंकज की शादी नेहा से करवा दी. नेहा बहुत खुश थी,लेकिन पहली रात ही पता चल चुकी थी की पंकज थोड़ा सा सुस्त है, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? उसने भी पंकज से कोई प्यार या हमदर्दी नहीं दिखाई,
अपनी ही जीन्दगी में मशगूल हो गयी, इधर संजीव ने जब नेहा को देखा तो उसकी सुंदरता पर वो लट्टू हो गया,और वो नेहा के आगे-पीछे करने लगा, हलाकि संजीव भोपाल में ही जॉब करने लगा था और शर्मा जी की गुजर जाने के बाद संजीव ही पूरा घर का खर्चा चला रहा था, इसलिए पंकज बिलकुल अकेला सा हो गया था, संजीव का घर में बोल-बाला था और उसकी भाभी नेहा का.
धीरे-धीरे नेहा और संजीव में शारीरिक संबंध भी बन गए और एक दिन नेहा ने एक बेटे को जन्म दिया, पंकज ने इसका विरोध किया, उसने कहा की ये बेटा मेरा नहीं हो सकता, क्योंकि अभी तक उसने नेहा को छुआ भी नहीं,फिर वो माँ कैसे बन गयी,वो बार बार नेहा से पूछने लगा की ये किसका बेटा है? अब तो नेहा को लगा की उसका भेद खुल जायेगा,इसलिए नेहा और संजीव ने मिल कर पंकज को अपने रास्ते से हटा देने का प्लान बना लिया और एक रात उन दोनों ने मिल कर पंकज को जान से मार दिया.अब तो दोनों खुले आम संबंध बनाने लगे. संजीव,नेहा को दिलासा देने लगा की वो उससे शादी करेगा और बेटे को अपना नाम देगा.
नेहा बहुत खुश थी, तभी आस-पास के लोगो ने संजीव की माँ को कहना शुरू कर दिया की नेहा की शादी संजीव से करवा दे. अब संजीव की माँ भी संजीव को नेहा से शादी कर लेने को कहने लगी,क्योंकि वो नहीं चाहती थी की उसके परिवार की बदनामी हो. इधर एक दिन संजीव को मुंबई की एक बेहतरीन कम्पनी से कॉल आया और उसे तुरंत काम शुरू करने के लिए बुलाया,सैलरी भी बहुत अच्छी थी,संजीव ने कहा की वो कंपनी में काम करके आता है तो आने के बाद नेहा से शादी कर लेगा और उसे ले कर मुंबई भी चला जायेगा,
लेकिन महीने दर महीने बीत गए लेकिन संजीब नहीं आया,बाद में पता चला की संजीव ने वहीँ दूसरी लड़की से शादी कर ली. इस तरह नेहा अकेली हो गयी जो कल तक महरानी बन कर रहती थी आज वो नौकरानी बन कर रह गयी,पति भी गया,प्रेमी भी गया,शानो-शौगत गया,आज उसे एहसास हुआ की उसने कितनी बड़ी गलती कर दी पंकज की जान ले कर,काश वो पंकज का ध्यान रखती तो आज उसकी ये स्थिति नहीं होती.आजु उसे पता चल गया की हसरे-ए-बेवफाई क्या होती है?
मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Love Story Leb” कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
धन्यवाद्।
जबकि बेटी का नाम श्रुति था.पंकज बचपन से ही पढ़ने में बहुत तेज था, वो हर क्लास में टॉप आता था, शर्मा जी पंकज से बहुत खुश रहा करते थे,जबकि छोटा संजीव भी पढ़ने में तेज था,लेकिन कभी अव्वल नहीं आता था. शर्मा जी उम्मीद थी की उनका बड़ा बेटा पंकज जुरूर उनका नाम रौशन करेगा.
वक्त के साथ साथ दोनों बेटे और बेटी बड़े हो गए,हलाकि शर्मा जी को अपनी बेटी की चिंता जरूर होती थी, क्योंकि उनकी बेटी को पढ़ने में कभी मन नहीं लगा था.खैर शर्मा जी ने सोच रखा था की वो अपनी बेटी की शादी कर देंगे,अगर वो आगे नहीं पढ़ी तो. तीनो बच्चे बड़े हो गए,और हुआ भी वही श्रुति ने आगे पढ़ने से मना कर दिया और शर्मा जी ने श्रुति की शादी कर दी. इधर पंकज जी-तोड़ मेहनत कर रहा था,
लेकिन उसकी किस्मत थी की साथ ही नहीं दे रहा था,और देखते देखते पंकज का सरकारी जॉब नहीं हुआ और पंकज बिलकुल बेढंगा की तरह रहने लगा, वैसे भी उसे दुनिया दारी से कोई मतलब नहीं थी,उसने सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई ही की थी,और जॉब ना होने की वजह से वो बिलकुल टूट चूका था,या यूँ कह ले की उसकी मानसिक स्थिति सही नहीं रही, डॉक्टर से दिखाया गया,डॉक्टर ने कहा, परेशान ना हो,इन्हे जितना प्यार दे सकते हैं, उतना प्यार दे.
धीरे-धीरे ये ठीक हो जायेंगे. शर्मा जी के दोस्तों ने उन्हें सलाह दिया की पंकज की शादी करवा दे, ताकि उसे प्यार और उसका केयर करने के लिए कोई आ जाएगी तो वो बिलकुल ठीक हो जायेगा. शर्मा जी ने अपने दोस्तों की बात मान ली और एक अच्छा रिश्ता आया, लड़की का नाम नेहा था, जो बहुत सुन्दर थी, शर्मा जी ने पंकज की शादी नेहा से करवा दी. नेहा बहुत खुश थी,लेकिन पहली रात ही पता चल चुकी थी की पंकज थोड़ा सा सुस्त है, उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे? उसने भी पंकज से कोई प्यार या हमदर्दी नहीं दिखाई,
अपनी ही जीन्दगी में मशगूल हो गयी, इधर संजीव ने जब नेहा को देखा तो उसकी सुंदरता पर वो लट्टू हो गया,और वो नेहा के आगे-पीछे करने लगा, हलाकि संजीव भोपाल में ही जॉब करने लगा था और शर्मा जी की गुजर जाने के बाद संजीव ही पूरा घर का खर्चा चला रहा था, इसलिए पंकज बिलकुल अकेला सा हो गया था, संजीव का घर में बोल-बाला था और उसकी भाभी नेहा का.
धीरे-धीरे नेहा और संजीव में शारीरिक संबंध भी बन गए और एक दिन नेहा ने एक बेटे को जन्म दिया, पंकज ने इसका विरोध किया, उसने कहा की ये बेटा मेरा नहीं हो सकता, क्योंकि अभी तक उसने नेहा को छुआ भी नहीं,फिर वो माँ कैसे बन गयी,वो बार बार नेहा से पूछने लगा की ये किसका बेटा है? अब तो नेहा को लगा की उसका भेद खुल जायेगा,इसलिए नेहा और संजीव ने मिल कर पंकज को अपने रास्ते से हटा देने का प्लान बना लिया और एक रात उन दोनों ने मिल कर पंकज को जान से मार दिया.अब तो दोनों खुले आम संबंध बनाने लगे. संजीव,नेहा को दिलासा देने लगा की वो उससे शादी करेगा और बेटे को अपना नाम देगा.
नेहा बहुत खुश थी, तभी आस-पास के लोगो ने संजीव की माँ को कहना शुरू कर दिया की नेहा की शादी संजीव से करवा दे. अब संजीव की माँ भी संजीव को नेहा से शादी कर लेने को कहने लगी,क्योंकि वो नहीं चाहती थी की उसके परिवार की बदनामी हो. इधर एक दिन संजीव को मुंबई की एक बेहतरीन कम्पनी से कॉल आया और उसे तुरंत काम शुरू करने के लिए बुलाया,सैलरी भी बहुत अच्छी थी,संजीव ने कहा की वो कंपनी में काम करके आता है तो आने के बाद नेहा से शादी कर लेगा और उसे ले कर मुंबई भी चला जायेगा,
लेकिन महीने दर महीने बीत गए लेकिन संजीब नहीं आया,बाद में पता चला की संजीव ने वहीँ दूसरी लड़की से शादी कर ली. इस तरह नेहा अकेली हो गयी जो कल तक महरानी बन कर रहती थी आज वो नौकरानी बन कर रह गयी,पति भी गया,प्रेमी भी गया,शानो-शौगत गया,आज उसे एहसास हुआ की उसने कितनी बड़ी गलती कर दी पंकज की जान ले कर,काश वो पंकज का ध्यान रखती तो आज उसकी ये स्थिति नहीं होती.आजु उसे पता चल गया की हसरे-ए-बेवफाई क्या होती है?
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