मेरे पड़ोस में रहने
वाला संजीव, गोरखपुर से आया था.वो अभी अभी दिल्ली शिफ्ट ही किया था, उसे
उसके किसी रिश्तेदार ने यहाँ रूम दिलवाया था, और उसका एडमिशन पास के ही एक
इंस्टिट्यूट में करवाया था.दो-तीन दिन तो सब कुछ सही चलता रहा, फिर एक शाम
संजीव मेरे कमरे पर आया और बोला,ये कैसा जगह है, मैंने पूछा क्यों? संजीव
ने बताया की गोरखपुर में सभी दोस्त बोल रहे थे की दिल्ली में बहुत सी
लड़किया मिल जाती हैं. लेकिन यहाँ तो आस-पास कोई लड़की नहीं दिखती.मुझे सुन
कर हस्सी आ गयी,
और मैंने पूछा, तुम यहाँ पढ़ने आये हो या लड़की तलाश करने. संजीव थोड़ा सा झेप गया और फिर बोला की आया तो हूँ पढ़ने के लिए ही लेकिन लड़की भी मिल जाती तो सोने पर सुहागा हो जाता. फिर पढ़ने का मजा ही कुछ और होता, उसकी बातें सुन कर मुझे लग गया की वो दिल्ली पढ़ने नहीं मस्ती करने आया है, मैंने उसे कहा की यहाँ कोई लड़की नहीं है,जो है भी वो तुम्हारे लिए ना ही बैठी हुई है ना ही तुम्हारे आने का इंतजार रही थी, इसलिए पढ़ने पर ध्यान दो. मेरी बात संजीव को अच्छी नहीं लगी और वो उठ कर चला गया, मेरी समझ में आ गया की मेरी बात संजीव को बुरी लग गयी, लेकिन मैंने कुछ गलत भी नहीं कहा था,
वापस मैं अपने काम में लग गया, सुबह उठा तो देखा संजीव के रूम में ताला लटक रहा था, मुझे ताजुब हुआ की इतनी सुबह सुबह ये कहाँ चला गया, फिर सोचा जरूर लड़की की तलाश में निकला होगा, कुछ देर के बाद संजीव को खुश आता देख, मैं पूछ दिया की बहुत खुश नजर आ रहे हो,शायद कोई लड़की मिल गयी, उसने कहा हाँ मिल गयी, इसलिए खुश हूँ, लड़की मिलने की बात सुन कर मुझे ताजुब हुआ की ऐसा क्या हुआ सुबह सुबह की उसे लड़की मिल गयी, फिर मैंने सोचा जरूर ये टहलने गया होगा,और कोई लड़की इससे टकराई होगी इसलिए ये इतना खुश है, मैंने सोचा चलो अच्छी बात है, पढ़ाई ना सही लड़की ही मिल गयी और मैं बिना कुछ पूछे अपने काम में लग गया,
दो दिनों के बाद संजीव को सारा सामान पैक करते हुए पाया तो मुझे लगा की संजीव वापस गोरखपुर जा रहा है, जरूर लड़की ने दिल तोडा होगा, मैंने संजीव से कहा, दो दिनों में ही लड़की से मन भर गया जो अपने गांव वापस जा रहे हो. संजीव हसने लगा और बोला मैं गांव नहीं जा रहा हूँ बल्कि लड़की के बगल में शिफ्ट हो रहा हूँ. मुझे ये जान कर और हैरानी हुई की भला कहाँ इसे ऐसी लड़की मिल गयी जो दो दिनों में ही ये उस लड़की के बगल में रहने जा रहा है, मैंने सिर्फ इतना पूछा कहाँ शिफ्ट हो रहे हो? इस पर उसने इंद्रा पुरम का नाम बताया,मैंने कहा वहां की लड़की कैसे तुम्हे मिल गयी और ये तो दिल्ली का एन्ड है,
मतलब दिल्ली समाप्त समझो, वहां से इंस्टिट्यूट कैसे आओगे? संजीव ने कहा, उसकी टेंशन आप ना लो, मैं आ जाऊंगा. फिर मैंने सोचा सही बात है, वो पढ़ें ही कब आया था, वो लड़की के लिए ही दिल्ली आया था, सो लड़की मिल गयी इसलिए वो कहीं जाएँ, मुझे उससे क्या मतलब रखना.कुछ दिनों के बाद मैं अपने काम में इतना व्यस्त हो गया की मझे संजीव का ख्याल भी नहीं आया.करीब 10 दिनों के बाद संजीव को वापस अपने सामान के साथ अपनी गेट पर खड़ा पाया, अब तो मुझे और हैरानी हुई की 10 दिनों में ही ये वापस आ गया, आखिर गया कहाँ था,और वापस क्यों आ गया? संजीव की आँखें नम थी, उसकी हालत देख कर मुझे हिम्मत नहीं हुई, उससे कुछ पूछने की, मैंने उसे अपने रूम में आने दिया, वो मुझसे रिक्वेस्ट कर रहा था की मुझे वापस से रूम दिला दे, वो अब लड़की के चक्कर में नहीं पड़ेगा,
सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देगा, मैंने कहाँ की वो अपने रिश्तेदार से बात कर ले, इस पर उसने बताया की उसके रिश्तेदार को पता चल गया है की मैंने रूम छोड़ कर इंद्रा पुरम चला गया था, वो बहुत गुस्से में हैं, इसलिए उनसे बात नहीं कर सकता, मैंने उसे रात में अपने यहाँ ही रुकने को बोला और कहा की सुबह वो रूम के मालिक से बात कर लेगा, रात को खाना खाने के बाद संजीव ने खुद अपनी आप बीती सुनानी शुरू की, उसकी कहानी सुन कर मेरी हस्सी रुक ही नहीं रही थी, मैं चाह कर भी अपनी हस्सी नहीं रोक पाया, उसका चेहरा देखने लायक था, वो दिल से रो रहा था और मैं था की मेरी हस्सी रुक ही नहीं रही थी, थी ही इतनी मजेदार बात
संजीव ने बताया की, उस दिन सुबह सुबह वो चाय पिने के लिए पास के नुक्कड़ पर गया था, जहाँ दो लोग आपस में बात कर रहे थे,उनमे से एक बोल रहा था की वहां बहुत सुन्दर-सुन्दर, गोरी-गोरी है, उसने हरियाणा से मंगवाया है, वो हरियाणा से कम उम्र की मंगवाता है जो देखने में बहुत ही सुन्दर और खूबसूरत होती हैं,जिसे देख कर दिल खुश हो जाता है, वो उनका नाम करीना,तो अलका तो मधुबनती बता रहे थे. बस क्या था?
मैंने उनसे पूछ लिया की आपके पास रहने के लिए कोई जगह खाली है? उन्होंने बताया की जगह ही जगह है, उनकी खुद की बिल्डिंग है, उसी में जगह खाली है, मैंने वहीँ रेंट की बात कर ली और दो दिनों के बाद उनके यहाँ चला गया, रेंट भी कम था वहां का, वाकई अच्छी जगह थी, खुला-खुला मैदान था, लेकिन उनके घर के पीछे तबेला था, जहाँ से हमेशा गंध आती थी, लेकिन सुन्दर सुन्दर लड़की देखने को मिलेगी तो वो गंध भी बर्दास्त कर लेता. दो दिन हो गए लेकिन उनकी बिल्डिंग में कोई लड़की नहीं नजर आयी,और आस-पास भी कोई लड़की नहीं नजर आयी, अब तो मैं सारा दिन लड़की की तलाश में लगा रहा लेकिन लड़की के बदले सिर्फ गोबर की गंध आती थी. तीनो दिनों के बाद भी कोई सुन्दर लड़की क्या बदसूरत लड़की भी नजर नहीं आयी,अब तो मैं आस-पास का इलाका भी घूम लिया,
वहां सिर्फ गायें और भैंस नजर आ रही थी, और सभी दूध का कारोबार करते नजर आये.मेरी समझ में नहीं आ रहा था की मैं लड़की की तलश करते हुए तबेले में आ गया हूँ, इसी तरह कुछ दिन और बीत गए, एक दिन मैं अचानक से उनसे पूछ लिया की हरियाणा से वो सुन्दर-सुन्दर, गोरी-गोरी जो लाये हैं,वो कहाँ है? वो मुझे तबेले में ले गए और एक गाय की तरफ इशारा करते हुए बताया की ये करीना है और दूसरी गाय की तरफ इशारा करते हुए बोला ये अलका है,
इसी तरह उन्होंने अपने और गायो से भी मिलवाया, कुछ हरियाणा और कुछ राजस्थान से मंगवाया था, तो कुछ उत्तर प्रदेश की गायें थी,संजीव की समझ में उस समय आया की उस दिन सुबह वो लड़की नहीं अपनी गायें की बातें कर रहे थे, फिर क्या था? वो अगले दिन ही सामान पैक किया और बिना कुछ किसी को बोले वापस यहाँ आ गया. अब तो मैं रात भर सो नहीं पाया और जब भी सोचता मुझे हस्सी आ जाती थी, आज भी वो वाक्या मुझे याद आती है तो मैं अकेले ही पागलो की तरह हसने लगता हूँ.
मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Love Story Leb” कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
धन्यवाद्।
और मैंने पूछा, तुम यहाँ पढ़ने आये हो या लड़की तलाश करने. संजीव थोड़ा सा झेप गया और फिर बोला की आया तो हूँ पढ़ने के लिए ही लेकिन लड़की भी मिल जाती तो सोने पर सुहागा हो जाता. फिर पढ़ने का मजा ही कुछ और होता, उसकी बातें सुन कर मुझे लग गया की वो दिल्ली पढ़ने नहीं मस्ती करने आया है, मैंने उसे कहा की यहाँ कोई लड़की नहीं है,जो है भी वो तुम्हारे लिए ना ही बैठी हुई है ना ही तुम्हारे आने का इंतजार रही थी, इसलिए पढ़ने पर ध्यान दो. मेरी बात संजीव को अच्छी नहीं लगी और वो उठ कर चला गया, मेरी समझ में आ गया की मेरी बात संजीव को बुरी लग गयी, लेकिन मैंने कुछ गलत भी नहीं कहा था,
वापस मैं अपने काम में लग गया, सुबह उठा तो देखा संजीव के रूम में ताला लटक रहा था, मुझे ताजुब हुआ की इतनी सुबह सुबह ये कहाँ चला गया, फिर सोचा जरूर लड़की की तलाश में निकला होगा, कुछ देर के बाद संजीव को खुश आता देख, मैं पूछ दिया की बहुत खुश नजर आ रहे हो,शायद कोई लड़की मिल गयी, उसने कहा हाँ मिल गयी, इसलिए खुश हूँ, लड़की मिलने की बात सुन कर मुझे ताजुब हुआ की ऐसा क्या हुआ सुबह सुबह की उसे लड़की मिल गयी, फिर मैंने सोचा जरूर ये टहलने गया होगा,और कोई लड़की इससे टकराई होगी इसलिए ये इतना खुश है, मैंने सोचा चलो अच्छी बात है, पढ़ाई ना सही लड़की ही मिल गयी और मैं बिना कुछ पूछे अपने काम में लग गया,
दो दिनों के बाद संजीव को सारा सामान पैक करते हुए पाया तो मुझे लगा की संजीव वापस गोरखपुर जा रहा है, जरूर लड़की ने दिल तोडा होगा, मैंने संजीव से कहा, दो दिनों में ही लड़की से मन भर गया जो अपने गांव वापस जा रहे हो. संजीव हसने लगा और बोला मैं गांव नहीं जा रहा हूँ बल्कि लड़की के बगल में शिफ्ट हो रहा हूँ. मुझे ये जान कर और हैरानी हुई की भला कहाँ इसे ऐसी लड़की मिल गयी जो दो दिनों में ही ये उस लड़की के बगल में रहने जा रहा है, मैंने सिर्फ इतना पूछा कहाँ शिफ्ट हो रहे हो? इस पर उसने इंद्रा पुरम का नाम बताया,मैंने कहा वहां की लड़की कैसे तुम्हे मिल गयी और ये तो दिल्ली का एन्ड है,
मतलब दिल्ली समाप्त समझो, वहां से इंस्टिट्यूट कैसे आओगे? संजीव ने कहा, उसकी टेंशन आप ना लो, मैं आ जाऊंगा. फिर मैंने सोचा सही बात है, वो पढ़ें ही कब आया था, वो लड़की के लिए ही दिल्ली आया था, सो लड़की मिल गयी इसलिए वो कहीं जाएँ, मुझे उससे क्या मतलब रखना.कुछ दिनों के बाद मैं अपने काम में इतना व्यस्त हो गया की मझे संजीव का ख्याल भी नहीं आया.करीब 10 दिनों के बाद संजीव को वापस अपने सामान के साथ अपनी गेट पर खड़ा पाया, अब तो मुझे और हैरानी हुई की 10 दिनों में ही ये वापस आ गया, आखिर गया कहाँ था,और वापस क्यों आ गया? संजीव की आँखें नम थी, उसकी हालत देख कर मुझे हिम्मत नहीं हुई, उससे कुछ पूछने की, मैंने उसे अपने रूम में आने दिया, वो मुझसे रिक्वेस्ट कर रहा था की मुझे वापस से रूम दिला दे, वो अब लड़की के चक्कर में नहीं पड़ेगा,
सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देगा, मैंने कहाँ की वो अपने रिश्तेदार से बात कर ले, इस पर उसने बताया की उसके रिश्तेदार को पता चल गया है की मैंने रूम छोड़ कर इंद्रा पुरम चला गया था, वो बहुत गुस्से में हैं, इसलिए उनसे बात नहीं कर सकता, मैंने उसे रात में अपने यहाँ ही रुकने को बोला और कहा की सुबह वो रूम के मालिक से बात कर लेगा, रात को खाना खाने के बाद संजीव ने खुद अपनी आप बीती सुनानी शुरू की, उसकी कहानी सुन कर मेरी हस्सी रुक ही नहीं रही थी, मैं चाह कर भी अपनी हस्सी नहीं रोक पाया, उसका चेहरा देखने लायक था, वो दिल से रो रहा था और मैं था की मेरी हस्सी रुक ही नहीं रही थी, थी ही इतनी मजेदार बात
संजीव ने बताया की, उस दिन सुबह सुबह वो चाय पिने के लिए पास के नुक्कड़ पर गया था, जहाँ दो लोग आपस में बात कर रहे थे,उनमे से एक बोल रहा था की वहां बहुत सुन्दर-सुन्दर, गोरी-गोरी है, उसने हरियाणा से मंगवाया है, वो हरियाणा से कम उम्र की मंगवाता है जो देखने में बहुत ही सुन्दर और खूबसूरत होती हैं,जिसे देख कर दिल खुश हो जाता है, वो उनका नाम करीना,तो अलका तो मधुबनती बता रहे थे. बस क्या था?
मैंने उनसे पूछ लिया की आपके पास रहने के लिए कोई जगह खाली है? उन्होंने बताया की जगह ही जगह है, उनकी खुद की बिल्डिंग है, उसी में जगह खाली है, मैंने वहीँ रेंट की बात कर ली और दो दिनों के बाद उनके यहाँ चला गया, रेंट भी कम था वहां का, वाकई अच्छी जगह थी, खुला-खुला मैदान था, लेकिन उनके घर के पीछे तबेला था, जहाँ से हमेशा गंध आती थी, लेकिन सुन्दर सुन्दर लड़की देखने को मिलेगी तो वो गंध भी बर्दास्त कर लेता. दो दिन हो गए लेकिन उनकी बिल्डिंग में कोई लड़की नहीं नजर आयी,और आस-पास भी कोई लड़की नहीं नजर आयी, अब तो मैं सारा दिन लड़की की तलाश में लगा रहा लेकिन लड़की के बदले सिर्फ गोबर की गंध आती थी. तीनो दिनों के बाद भी कोई सुन्दर लड़की क्या बदसूरत लड़की भी नजर नहीं आयी,अब तो मैं आस-पास का इलाका भी घूम लिया,
वहां सिर्फ गायें और भैंस नजर आ रही थी, और सभी दूध का कारोबार करते नजर आये.मेरी समझ में नहीं आ रहा था की मैं लड़की की तलश करते हुए तबेले में आ गया हूँ, इसी तरह कुछ दिन और बीत गए, एक दिन मैं अचानक से उनसे पूछ लिया की हरियाणा से वो सुन्दर-सुन्दर, गोरी-गोरी जो लाये हैं,वो कहाँ है? वो मुझे तबेले में ले गए और एक गाय की तरफ इशारा करते हुए बताया की ये करीना है और दूसरी गाय की तरफ इशारा करते हुए बोला ये अलका है,
इसी तरह उन्होंने अपने और गायो से भी मिलवाया, कुछ हरियाणा और कुछ राजस्थान से मंगवाया था, तो कुछ उत्तर प्रदेश की गायें थी,संजीव की समझ में उस समय आया की उस दिन सुबह वो लड़की नहीं अपनी गायें की बातें कर रहे थे, फिर क्या था? वो अगले दिन ही सामान पैक किया और बिना कुछ किसी को बोले वापस यहाँ आ गया. अब तो मैं रात भर सो नहीं पाया और जब भी सोचता मुझे हस्सी आ जाती थी, आज भी वो वाक्या मुझे याद आती है तो मैं अकेले ही पागलो की तरह हसने लगता हूँ.
मैं आशा करता हूँ की आपको ये “Love Story Leb” कहानी आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
धन्यवाद्।
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