आज शादी की 25 वी सालगिरह थी,स्वेता जानती थी आज सुबह से गायब हुए उसके पति शुभम देर रात घर आएंगे . शादी के इतने सालो में शुभम ने इस दिन को मनाना तो दूर कभी विश तक नहीं किया. स्वेता समझ नहीं पा रही थी आखिर ऐसी कौन सी कमी है उसके फर्ज और उसके प्यार में की शुभम ने इस रिश्ते को निभाया है सिर्फ एक जिम्मेदारी की तरह, पति और पत्नी के बीच जो प्यार होना चाहिए जो फीलिंग्स होनी चाहिए वो उसने अपने और शुभम के बीच कभी महसूस ही नहीं की . वैसे तो ऊपर से देखने पर सबकुछ सही लगता है 

एक आदर्श पति पत्नी जिनके बिच कभी झगड़े नहीं होते और अपने दो बच्चो के जिम्मेदार माता -पिता . सिर्फ स्वेता जानती थी ये बच्चे भी प्यार की निशानिया नहीं है ये उन पलों की देन है जब शुभम अपने होश में नहीं होते थे. वो जितना भी सोचती शुभम के बारे में उतना ही उलझती जाती अपने माँ -बाप का आदर्श बेटा ,अपने बच्चो पर जान छिरकनेवाला पापा, ऑफिस में एक अच्छा एम्प्लॉयी , दोस्तों का दोस्त आखिर अपनी पत्नी से इतनी दुरी क्यों? स्वेता को याद नहीं कभी उसने उससे प्यार से बात की हो . सिर्फ जरुरत जितनी हैं बात होती उन दोनों के बीच . स्वेता ने अपनी पूरी कोशिश की शुभम का दिल जितने की लेकिन 25 साल के बाद भी एक ही छत के निचे रहकर दोनों अजनबी की तरह ही हैं अब भी. अपने ही खयालो में खोयी स्वेता का ध्यान भंग हुआ जब उसकी सास ने उसे आवाज लगायी . 

स्वेता की सास का चेहरा ख़ुशी से दमक रहा था और उन्होंने बताया की आज उनके बारे बेटे की चिट्ठी आयी है वो 27 साल बाद घर वापस आ रहा है . स्वेता को पता तो था की शुभम का कोई बड़ा भाई भी है जो 27 साल पहले घर से चले गए थे , लेकिन उनकी चर्चा होते ही उसकी सास रो रो कर अपना बुरा हाल कर लेती इसलिए उसके ससुरजी ने सबको हिदायत दी थी की उसकी कोई चर्चा ना करे . और अपने बारे बेटे का सारा सामान पैक करके उन्होंने स्टोर में बंद करके लॉक कर दिया . और उस स्टोर रूम को खोलने की इजाजत किसी को नहीं थी . आज वही आ रहे थे स्वेता की सास ने स्वेता को हिदायत दी की आज सारा खाना उसकी पसंद का बनाने को और उसके लिए रूम तैयार कर देने को .

 शुभम के पापा ने शुभम को भी जल्दी आने को कहा और ये खुशखबरी दी . शुभम स्वेता को इस तरह खुश होकर उसके भाई के आने की तैयारी में जुटा देखकर और भी ज्यादा अपसेट हो रहा था . उसे घर में रुकना बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा था . उसका दिल चाह रहा था वो अभी यहाँ से भाग जाये लेकिन अपने पेरेंट्स की ख़ुशी की खातिर वो मजबूर था और चाह कर भी कही जा नहीं सकता था . 

शाम हुई और उसका भाई समीर आज पुरे 27 साल बाद वापस आया . घर में सब बहुत खुश थे सिवाए शुभम के . समीर को अजीब लगा की शुभम इतना चुप- चुप सा क्यों हैं ? वो अपने भाई से बात करना चाहता था और शुभम बस हाँ -हु में जवाब दे रहा था . फिर समीर ने स्वेता से बात शुरू की और उसे पता चला की वो भी उसी कॉलेज से पढ़ी है, जिसमे वो भी पढ़ा करता था . स्वेता बहुत खुश हुई और दोनों के बिच कॉलेज की बाते होने लगी . आज इतने साल बाद पुरानी बातें याद करके स्वेता एकदम बच्चो की तरह खुश होने लगी .

स्वेता की खुश और उसका इस तरह से समीर के साथ हसना बोलना अब शुभम की बर्दास्त से बाहर हो गया . उसने एकदम चीखकर कहा पुराने दोस्त क्यों पुराने चाहनेवाले कहो , और इतने दिन बाद मिले तो ख़ुशी तो होगी ही . स्वेता ,समीर और शुभम के पेरेंट्स सभी अवाक रह गए ये क्या हो गया शुभम को इतनी घटिया बात उसके मुँह से निकली कैसे ? समीर को बहुत गुस्सा आया स्वेता रोने लगी . शुभम तेजी से स्टोर रूम गया और समीर के पुराने बॉक्स से ढेर सारी चिट्ठियां निकाल के लाया . और स्वेता के मुँह पे मारकर बोला बताओ ये चिट्ठियां तुमने लिखी है या नहीं ? स्वेता ने देखा समीर ने भी देखा . 

समीर ने कहा ये चिठ्ठिया स्वेता ने नहीं लिखी ये मंदिरा ने लिखी है उसकी गर्लफ्रेंड थी वो जो बंगालन थी और उससे बहुत प्यार करती थी . दोनों शादी भी करना चाहते थे और समीर ने सोचा था की पढ़ाई ख़त्म करके वो उसके पेरेंट्स से बात करेगा . लेकिन मंदिरा के पेरेंट्स नहीं माने और उसकी शादी किसी और के साथ तय कर दी . मंदिरा ने किसी और की होने की वजाय मौत को चुन लिया . और इस बात से समीर इतना दुखी हुआ की उसने कभी शादी ना करने की कसम खा ली और घर छोरकार चला गया . शुभम का गुस्सा अब भी शांत नहीं हुआ उसने कहा की ये हैंड राइटिंग स्वेता की है .

 स्वेता ने माना की हाँ उसने ही लिखे वो और मंदिरा हॉस्टल में रूममेट थे . और उसको हिंदी नहीं आती थी वो स्वेता की सीनियर भी थी तो उसने उसकी मदद की बस . अब शुभम को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे शादी के 2 दिन बाद ही स्वेता की डायरी उसके हाथ लग गयी और उसकी हैंड राइटिंग और उसके भाई के लव लेटर्स एक जैसे होने के कारन उसने दिल ही दिल में समीर की बर्बादी की वजह स्वेता को मान लिया . उसको लगा की स्वेता ही वो लड़की ही जिसने उसके भाई को शायद धोखा दिया जिसकी वजह से उसने शादी ना करने की कसम खायी और वो घर छोड़कर चला गया . 

आज 25 साल बाद उसके दिल में गरी शक की कील निकल चुकी थी . उसने रोकर स्वेता से माफ़ी मांगी . उसके आसुओ में उसकी सारी नफरत भी बह गयी . शादी की २५वी सालगिरह पर स्वेता को सबसे बड़ा गिफ्ट मिला उसका पति शुभम .

मै आशा करता हूँ की आपको ये “Love Story Leb Ki Kahani ” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

 धन्यवाद्।  


0 comments

Post a Comment

Next previous home

Popular Posts